चिढ है मुझे... Chidh Hai Mujhe...

तुझसे नफ़रत नहीं करता, बस तेरी यादों से दूर भागता है.
तुझे देखना चाहता है, पर देखने से डरता है... 
तू छोड़ जाये इस बात का गम नही...
बस एक अलविदा की आस, आज भी रखता है... 
वो आँधियों से लड़ता था, आज भी लड़ता है...
बस  फर्क इतना है, पहले तेरे लिए लड़ता था,आज खुद के लिए लड़ता है...
काश, काश तुझसे आँख मिलने के बाद, रुक जाता ये जहां...
बस  तुझे देख देख बिता देता ये जनम... 
पूछते है ये लोग, क्या करता है दिन भर... 
जवाब में सिर्फ "तेरा ज़िक्र" निकलता है... 
दिखलाता हु सबको, की नफ़रत है तुझसे... 
की मुझे फर्क नहीं पड़ता... 
पर दिल ये हर धड़कन तेरे नाम की लेता है... 
सच कहु तो तेरी हसी से चिढ है मुझे...
मेरे सिवा  कोई और तेरी हसी का कारन बने... 
इससे चिढ है मुझे... 
सच कहु तो तेरे ख़ूबसूरत  कपड़ों से चिढ है मुझे... 
मेरे सिवा  कोई और उनकी तारीफ करे... 
इससे चिढ है मुझे... 
सच कहु तोह तेरे हर उस हर्फ़ से चिढ है मुझे... 
जो किसी और के लिए निकले... 
क्यूंकि इक वक़्त था, जब इन सब पे मेरा हक़ था... 
सच कहु तोह...आज खुद से ही चिढ है मुझे... 

-Krishh (With an extra 'h')



Tujhse nafrat nahi krta, bs teri yadon se door bhaagta hai…
Tujhe dekhna chahta hai, pr dekhne se darta hai…
Tu chhor jaye, is baat ka gum nahi…
Bs ek alvida ki aas, aaj bhi rkhta hai…
Vo aandhiyon se ladta tha, aaj bhi ladta hai…
Bs fark itna hai, pehele tere liye ldta tha, aaj khud k liye ladta hai…
Kaash, kaash tujhse aank milne k baad ruk jata ye jahan…
Bs tujhe dekh dekh, bita deta ye janam…
Poochte hai ye log, kya krta hai din bhr…
Jawab me sirf “tera zikr” nikalta hai…
Dikhlata hu sbko, ki nafrat hai tujhse…
Ki mujhe fark nahi padta…
Pr dil ye hr dhadkan sirf teri naam ki leta…
Sch kahu toh teri hasi se chidh hai mujhe,
Mere siva teri hasi ka koi or karan bane isse,
Chidh hai mujhe…
Sch kahu toh tere khoobsurat kapdon se chidh hai mujhe,
Mere siva koi or unki tareef kar, isse chidh hai mujhe…
Sch kahu toh tere hr us harf se chidh hai mujhe,
jo kisi or k liye nikle...
Kyuki ek waqt tha jb in sb pe mera hkk tha…
Sch kahu toh, aaj khud se hi chidh hai mujhe...


-Krishh (with an extra 'h').

Comments

Popular Posts