सब कुछ वही SAB KUCH VAHI
है ये चाँद वही, ये आशियाँ वही, ये पंख वही ये आसमां वही,
है रिश्तों के मोड़ वही, इन मोड़ पर कंकड़ वही,
इस बाग़ में खिलते फूल वही, फूलों के निखरते रंग वही,
है दिल वही जज़्बात वही, इन जज़्बातों के एहसास वही,
है कमी तोह बस इक यही, यहाँ तू नहीं, यहाँ तू नहीं...|
इन गुर्बतों में फ़ज़ा वही, इस तन्हाई की कोई दवा नहीं,
है जिस्म मेरा गीला हुआ, इन आसुओं की नमी से ही,
ले, वादे मैंने किये वही, है हसने का मगर दिल नहीं |
हो मिलना मुम्किन जहां, तो मुझको रहना फिर वही,
है रात लम्बी ये बहोत, तेरे किस्सों की जैसे झड़ी कोई |
बदले शहर में हैं कई, पर मई रहा कही वहीं,
ये शहर नया, यहाँ सब नए, बनाये मैंने दोस्त नए,
है चमकते ये चहरे वही, पर इस भीड़ में अपना कोई नहीं...
- Krishh(With an extra 'h')
Hai ye chaand vahi, ye aashiyan vahi, ye pankh vahi ye asmaan vahi,
Hai raaston k mod vahi, in mod pr kankad vahi,
Is baagh me khilte phool vahi in phoolon k nikharte rang vahi,
Hai dil vahi jazbaat vahi, in jazbaaton k ehsaas vahi,
Hai kami toh bs ek yahi, yaha tu nahi, yaha tu nahi...
In gurbaton me fasa vahi, is tanhaai ki koi dava nahi,
Hai jism mera gila hua, in aansuon ki nami se hi,
Le vaade maine kiye vahi, hai hasne ka mgr dil nahi
Ho tujhse milna mumkin jaha, toh mujhko rehena fir vahi,
Hai raat lambi ye bhot, tere kisson ki jaise jhadi koi,
Badle sheher maine hai kai, pr mai raha kahi vahi,
Ye sheher naya yaha sb naye, banaye maine dost naye
Hai chamakte ye chehere vahi, pr is bheed me apna koi nahi...
- Krishh(With an extra 'h')
Comments
Post a Comment