आ गया है AA GAYA HAI
सो जाता हू , करते हुए तेरी बातें, ख़्वाबों से तेरी शिकायतें,
खर्च देता हू, तेरे सपनो के खातिर, अपनी हसीं रातें,
मैं बिखरा हू, समेट ले मुझे, अपनी मुस्कुराहटों से,
खली तहखाना हू, भर दे मुझे अपनी चाहतों से।
किनारा हू, डाल भी दे लंगर,
कितना दूर जाओगी अकेले तूफानों में,
हर सफ़र का एक अंत होता है,
तू सिमट जा मेरी बाहों में।
एक बस तू न मिली,
बाकी जीत लिया ये जग सारा,
सोचा था बनेगा तेरे मेरा, थोड़ा और लम्बा अफसाना,
पर तू जो गई है, ग़म है...
और बात है, वक़्त क साथ अब थोड़ा कम है...
इन लम्बी रातों का तोड़ निकल लिया है मैंने,
खेलना सीख लिया है अंधेरों से मैंने।
ये रेहमत है उसकी की मुस्कुराना याद आ गया है,
बिना पिए ग़म भूलना आ गया है।
कहते है जिस सफर को पूरा न किया जा सके,
उसे इक हसीं मोड़ दे कर छोड़ देना चाहिए।
सोचा था तू सफर है मेरा,
पर तू वही हसीं मोड़ है...दिल्लगी के सफर का...समझ आ गया है।
-Krishh (With an extra 'h')
So jaata hu, krte hue teri baatein, khwaabon se, teri shikayatein,
kharch deta hu, tere sapno k khatir, apni haseen raatein..
Mai bikhra hu, samet le mujhe, apni muskuraahaton se,
khali tehkhana hu, bhr de mujhe, apni chahaton se,
kinara hu, daal bhi de langar,
kitna door jayegi akele toofano me,
hr safar ka ant hota hai,
tu simat jaa meri baahon me..
Ek bs tu na mili,
baaki jeet liya ye jag saara..
Socha tha bnega,
tera mera thoda or lamba afsana..
Pr tu jo gai hai,
gum hai,
or baat hai, waqt k saath, ab thoda kum hai..
In lambi raaton ka tod nikaal liya hai maine,
khelna seekh liya hai, andheron se maine,
ye rehemat ahi uski ki muskurana yaad aa gaya hai,
bina piye gum bhoolana aa gaya hai..
Kehete hai jis safar ko poora na kiya jaa sake,
use ek haseen mod de kr chhod dena chahiye,
socha tha tu safar hai mera....
Pr tu vahi haseen mod hai, dillagi k safar ka, samajh aa gaya hai..
-Krishh (With an extra 'h')
खर्च देता हू, तेरे सपनो के खातिर, अपनी हसीं रातें,
मैं बिखरा हू, समेट ले मुझे, अपनी मुस्कुराहटों से,
खली तहखाना हू, भर दे मुझे अपनी चाहतों से।
किनारा हू, डाल भी दे लंगर,
कितना दूर जाओगी अकेले तूफानों में,
हर सफ़र का एक अंत होता है,
तू सिमट जा मेरी बाहों में।
एक बस तू न मिली,
बाकी जीत लिया ये जग सारा,
सोचा था बनेगा तेरे मेरा, थोड़ा और लम्बा अफसाना,
पर तू जो गई है, ग़म है...
और बात है, वक़्त क साथ अब थोड़ा कम है...
इन लम्बी रातों का तोड़ निकल लिया है मैंने,
खेलना सीख लिया है अंधेरों से मैंने।
ये रेहमत है उसकी की मुस्कुराना याद आ गया है,
बिना पिए ग़म भूलना आ गया है।
कहते है जिस सफर को पूरा न किया जा सके,
उसे इक हसीं मोड़ दे कर छोड़ देना चाहिए।
सोचा था तू सफर है मेरा,
पर तू वही हसीं मोड़ है...दिल्लगी के सफर का...समझ आ गया है।
-Krishh (With an extra 'h')
So jaata hu, krte hue teri baatein, khwaabon se, teri shikayatein,
kharch deta hu, tere sapno k khatir, apni haseen raatein..
Mai bikhra hu, samet le mujhe, apni muskuraahaton se,
khali tehkhana hu, bhr de mujhe, apni chahaton se,
kinara hu, daal bhi de langar,
kitna door jayegi akele toofano me,
hr safar ka ant hota hai,
tu simat jaa meri baahon me..
Ek bs tu na mili,
baaki jeet liya ye jag saara..
Socha tha bnega,
tera mera thoda or lamba afsana..
Pr tu jo gai hai,
gum hai,
or baat hai, waqt k saath, ab thoda kum hai..
In lambi raaton ka tod nikaal liya hai maine,
khelna seekh liya hai, andheron se maine,
ye rehemat ahi uski ki muskurana yaad aa gaya hai,
bina piye gum bhoolana aa gaya hai..
Kehete hai jis safar ko poora na kiya jaa sake,
use ek haseen mod de kr chhod dena chahiye,
socha tha tu safar hai mera....
Pr tu vahi haseen mod hai, dillagi k safar ka, samajh aa gaya hai..
-Krishh (With an extra 'h')
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